संवत् 2083 विक्रमी | भाद्रपद कृष्ण द्वादशी | बुद्धवार
नक्षत्र: मघा | योग: शुभ | करण: तैतिल
पर्व विशेष : | तदनुसार 07 अक्टूबर 2026
शिक्षा : एमसी गणित,एम हिन्दी, एम.ए.(समाजशास्त्र)नेट/सेट,
प्रमुख रचनाएँ : बैगा समुदाय पर विशेष अध्ययन
व्यवसाय : अधीक्षक, प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास, आदिवासी विकास कबीरधाम
पता : ग्राम खंडसरा विकास खंड -बोड़ला जिला कबीरधाम छत्तीसगढ़
बैगा जनजाति 9 वर्ष बाद प्रकृति को समर्पित रसनवा पर्व मनाती है। मोहती का फूल खिलने पर यह समुदाय 15 दिनों तक विशेष पूजा करता है और एक साथ कुटकी तथा शहद का प्रसाद ग्रहण करता है। यह पर्व बैगा चक क्षेत्र की प्राचीन और जीवन्त परम्परा का हिस्सा है।
Read More
बैगा समाज में विवाह और बेटी की विदाई के समय गाए जाने वाले बिलमा गीत, बिरहा नृत्य, उसके शब्दार्थ और भावार्थ के बारे में विस्तार से जानिए।
Read More
बैगा जनजाति की शिकार परंपराएँ उनके प्रकृति-आधारित जीवन, कौशल और वैज्ञानिक समझ का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। इस लेख में धनुष-बाण से लेकर विविध प्रकार के फंदों तथा मछली पकड़ने की पारंपरिक विधियों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जो उनकी सामूहिक जीवनशैली और पर्यावरणीय ज्ञान को दर्शाता है…
Read More
छत्तीसगढ़ के बैगा चक क्षेत्र में आयोजित मड़ई मेला केवल हाट या उत्सव नहीं, बल्कि बैगा जनजाति की धार्मिक आस्था, सामाजिक परंपराओं और विवाह प्रथाओं का जीवंत केंद्र है। यह मेला देव आराधना, लोकनृत्य, सामूहिक उल्लास और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान का अनूठा प्रदर्शन प्रस्तुत करता है।
Read More
बैगा जनजाति की गोदना परम्परा केवल शृंगार नहीं, बल्कि पहचान, आस्था और जीवन-दर्शन है। आधुनिकता के दबाव में यह अमूल्य धरोहर विलुप्ति के कगार पर है। बैगा चक क्षेत्र की इस सांस्कृतिक विरासत, मान्यताओं और विधियों को समझने के लिए यह आलेख अवश्य पढ़ें।
Read More