संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल षष्ठी | शुक्रवार
नक्षत्र: मूल | योग: शोभन | करण: कौलव
पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अक्टूबर 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध, अनुभवपरक, नैतिक और जीवन-केंद्रित स्वरूप को रेखांकित करता यह आलेख डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से शिक्षा, चरित्र, विज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति और परिवर्तन के संतुलित भारतीय दृष्टिकोण को सहज रूप में प्रस्तुत करता है।
यह लेख भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा की ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसमें पांडुलिपियों की उत्पत्ति, विविध स्वरूप, ज्ञान-विज्ञान में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण हेतु ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के महत्व का विशद विवेचन प्रस्तुत किया गया है, जो भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने…
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम दक्षिण कोसल की धरती से जुड़े महान वैज्ञानिक आचार्य नागार्जुन को याद करते हैं। पारद विज्ञान, धातुशास्त्र और आयुर्वेद में उनके अद्भुत योगदान ने भारतीय विज्ञान को एक नई पहचान दी। उनका जीवन आज के युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करता है।
दलितों के मसीहा, संविधान निर्माता, बाबा साहब आदि अनेकों विशेषणों से सम्बोधित किए जानेवाले डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ। भीमराव, रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की चौदहवीं संतान थे। वे हिन्दू महार जाति से…
आर्थिक जगत में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान को हमेशा कमतर आंका गया है। डॉ. अम्बेडकर का कद इतना बड़ा था कि उसका आकलन छोटी बात नहीं है। आमतौर पर जन-जन में उनकी छवि संविधान निर्माता और युगांतरकारी नेता के रूप में ही प्रमुखता से रही है। अर्थ जगत में…