संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल षष्ठी | शुक्रवार
नक्षत्र: मूल | योग: शोभन | करण: कौलव
पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अक्टूबर 2026
यह लेख डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन, वैज्ञानिक योगदान और राष्ट्रदृष्टि को प्रस्तुत करता है। इसमें उनके संघर्ष, इसरो, मिसाइल कार्यक्रम, राष्ट्रपति कार्यकाल, ग्रामीण विकास, शिक्षा, युवाओं से संवाद और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के प्रेरक पक्षों का परिचय मिलता है।
यह लेख डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से असफलता शिक्षा नेतृत्व और सादगी का अर्थ समझाता है। इसमें वायुसेना चयन SLV-3 सतीश धवन विद्यार्थी जीवन और युवाओं पर मानसिक दबाव की चर्चा भी है।
यह लेख महारानी दुर्गावती के जीवन संघर्ष और शासन को राष्ट्र की जिजीविषा के संदर्भ में प्रस्तुत करता है। इसमें गढ़ कटंगा की सत्ता मुगल आक्रमण के प्रतिकार उनके साहस बलिदान और सांस्कृतिक स्वाधीनता के भाव को समझाया गया है।
यह लेख महात्मा गांधी के नेतृत्व को दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह दांडी यात्रा और साम्प्रदायिक हिंसा के समय उनके प्रयासों के माध्यम से समझाता है। इसमें सत्य अहिंसा आत्मानुशासन और जनभागीदारी से विकसित उनके प्रभाव को सामने रखा गया है।
यह लेख महाराणा सांगा के अभियानों में वागड़ की भूमिका को सामने रखता है। इसमें डूंगरपुर के महारावल उदय सिंह के सहयोग ईडर अभियान गुजरात संघर्ष और खानवा के युद्ध में उनके योगदान तथा बलिदान का वर्णन किया गया है।
यह लेख 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के संघर्ष को सामने रखता है। इसमें अंग्रेजी शासन के विरोध उनकी गिरफ्तारी बलिदान और महाकौशल तथा गोंडवाना में उनकी स्मृति का वर्णन है।
यह लेख राजा चक्रधर सिंह के जीवन और रायगढ़ दरबार की संगीत परंपरा को सामने रखता है। इसमें रायगढ़ कत्थक घराने गणेश मेले साहित्यिक साधना कलाकार संरक्षण और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में उनके योगदान का वर्णन है विस्तार से।
महाराजा चक्रधर सिंह के जीवन, संगीत-साधना, रायगढ़ घराने, धार्मिक चेतना, सामाजिक सुधार, राजनीतिक दूरदर्शिता और सांस्कृतिक विरासत पर केन्द्रित यह आलेख उन्हें जनसेवा, कला संरक्षण और राष्ट्रसमर्पण के प्रतीक के रूप में स्मरण करता है तथा आज प्रेरित करता है।
संविधान सभा की बहसों और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से यह आलेख धर्मनिरपेक्षता, समता, शिक्षा, परंपरा, अद्वैत और नागरिक स्वतंत्रता के संबंधों को समझते हुए भारतीय गणराज्य की नैतिक तथा बौद्धिक आधारभूमि का विवेचन प्रस्तुत करता है।
भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध, अनुभवपरक, नैतिक और जीवन-केंद्रित स्वरूप को रेखांकित करता यह आलेख डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से शिक्षा, चरित्र, विज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति और परिवर्तन के संतुलित भारतीय दृष्टिकोण को सहज रूप में प्रस्तुत करता है।
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में गौ माता को धर्म, परोपकार, ज्ञान और लोककल्याण से जोड़ा है। यह लेख गौ महिमा, रामावतार, ज्ञानदीप प्रसंग और पृथ्वी के गौ रूप के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना को रेखांकित करता है।
रानी अवंती बाई लोधी की शौर्यगाथा सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम का परिचय देती है। रामगढ़ से देवहारगढ़ तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष और उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास की प्रेरक विरासत है।
यह लेख रामगढ़ की रानी अवन्ती बाई के जीवन और सन् 1857 ईस्वी के स्वतन्त्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित है। इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन, अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष और मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की तथ्यात्मक जानकारी दी गई है।
यह लेख 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिवीर समशेर सिंह पारधी और पारधी समुदाय के योगदान को सामने लाता है। इसमें उनके रणकौशल, संगठन, बलिदान और जनजातीय स्वाभिमान की उस गौरवगाथा का स्मरण है।
मध्यप्रदेश के लोक पर्वों में संस्कृति, आस्था, प्रकृति, सामाजिक समरसता और लोक दर्शन का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। गणगौर, कजरियां, मड़ई, भगोरिया, गोटमार और घोटुल जैसी परम्पराएँ जनजीवन की सामूहिक चेतना को व्यक्त करती हैं, जिन्हें आधुनिकता और शहरीकरण के दौर में संरक्षित करने की आवश्यकता है।
यह आलेख कोटा चित्र शैली में भगवान श्रीराम के विविध प्रसंगों का कलात्मक और सांस्कृतिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अहिल्या उद्धार, राम-हनुमान मिलन, पुष्पक विमान, लव-कुश प्रसंग और राम दरबार जैसे चित्रों के माध्यम से कोटा शैली की भक्ति, समरसता, लोकसंस्कार और भारतीय कला परम्परा की गहन अभिव्यक्ति को रेखांकित…
यह लेख भारत की प्राचीन पांडुलिपि परंपरा की ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसमें पांडुलिपियों की उत्पत्ति, विविध स्वरूप, ज्ञान-विज्ञान में उनकी भूमिका तथा उनके संरक्षण हेतु ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के महत्व का विशद विवेचन प्रस्तुत किया गया है, जो भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ बनाने…
उदयपुर के निकट नागदा स्थित सास-बहू मन्दिर की हजार वर्ष पुरानी पाषाण शिल्पकला में रामायण के विविध प्रसंगों का अद्भुत अंकन भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अनुपम अभिव्यक्ति है। गुहिलकालीन इस मन्दिर में श्रीराम के वनवास, किष्किन्धा और लंका काण्ड के दृश्य अत्यन्त सूक्ष्मता और सजीवता के साथ उकेरे गए हैं…
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम दक्षिण कोसल की धरती से जुड़े महान वैज्ञानिक आचार्य नागार्जुन को याद करते हैं। पारद विज्ञान, धातुशास्त्र और आयुर्वेद में उनके अद्भुत योगदान ने भारतीय विज्ञान को एक नई पहचान दी। उनका जीवन आज के युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करता है।
जानिए उस महापुरुष की गाथा, जिसने 'स्वराज' का मंत्र दिया और आधुनिक भारत की नींव रखी। महर्षि दयानंद सरस्वती के क्रांतिकारी जीवन और आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास को समझने के लिए क्लिक करें।
यह लेख खादी को केवल वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत स्मृति, स्वदेशी आंदोलन, गांधी दर्शन और आत्मनिर्भरता की चेतना के रूप में प्रस्तुत करता है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक ‘खादी इंडिया’ ब्रांड तक, खादी की ऐतिहासिक यात्रा, सामाजिक भूमिका और समकालीन महत्व का समग्र विवेचन इसमें किया…
सन् 1910 का बस्तर भूमकाल अंग्रेजी अत्याचारों के विरुद्ध वनवासियों का सशक्त विद्रोह था, जिसका नेतृत्व वीर क्रांतिकारी गुण्डाधूर ने किया। जंगल अधिकारों, बेगारी, धर्मांतरण और शोषण से त्रस्त जनजातियों को उन्होंने संगठित किया। पारंपरिक अस्त्रों के साथ शुरू हुआ यह गुप्त संघर्ष ब्रिटिश प्रशासन को हिला गया और गुण्डाधूर…
रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध कथक नर्तक एवं संगीतज्ञ प्रो. कल्याणदास महंत का जीवन भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा के स्वर्णिम अध्यायों में से एक है। 1921 में बिलासपुर के मड़वा गांव में जन्मे कल्याणदास जी ने अपने बचपन से ही नृत्य और संगीत के वातावरण में शिक्षा पाई। सारंगढ़ और…
कठपुतली कला भारत की प्राचीन लोककलाओं में से एक है, जिसका उल्लेख महाभारत, रामायण और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों तक में मिलता है। लोककथाओं के अनुसार इसका उद्भव शिव-पार्वती से जुड़ा है, वहीं राजस्थान को इसका प्रमुख जन्मस्थल माना जाता है। धागा, छड़, छाया और दस्ताने जैसी विविध पद्धतियों में पाई…
यह आलेख राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में अभिव्यक्त मानव प्रेम, समता, संवेदनशीलता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की उदात्त भावना को दर्शाता है। गुप्त जी ने धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से मनुष्यत्व, त्याग, करुणा, और वसुधैव कुटुंबकम् की चेतना को काव्य में पिरोया। उनके राम मानव-प्रेम के…
यह आलेख 16 वर्षीय वनबाला वीरांगना दयावती कंवर के अद्भुत साहस की कहानी है, जिन्होंने 1930 में तमोरा गांव के जंगल सत्याग्रह के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और संगीनों के सामने डटे रहकर सत्याग्रहियों की रक्षा की। दयावती का यह बलिदान और निर्भीकता छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में…
यह आलेख वर्षा की कामना हेतु किए जाने वाले पारंपरिक लोक अनुष्ठान "इंद्र पूजा" पर आधारित है, जो भारत के विभिन्न अंचलों में सदियों से संपन्न होता आया है। विशेषकर निमाड़ अंचल की ‘ध्रुव पूजा’ पर केंद्रित यह लेख लोकविश्वास, लोकगीतों और प्रतीकात्मक क्रियाओं के माध्यम से इंद्रदेव को मनाने…
प्रो. कल्याणदास महंत छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे एक ऐसे नृत्य सम्राट थे, जिन्होंने कथक नृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से रायगढ़ घराने की परंपरा को देश-विदेश में सम्मान दिलाया। उन्होंने केवल मंच पर ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों और साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी कला से नई पीढ़ी…
प्रजावत्सल शासक प्रवीरचंद भंजदेव और उनकी संवेदनशीलता ।
यह लेख राजस्थान के नागौर स्थित दधिमती शक्तिपीठ के प्रतिहारकालीन मंदिर स्थापत्य में उत्कीर्ण रामकथा मूर्ति फलकों का सूक्ष्म विवेचन प्रस्तुत करता है। इसमें श्रीराम के वनवास, सीता हरण, सुग्रीव संवाद, सेतुबन्ध, लक्ष्मण शक्ति और राम-रावण युद्ध जैसे प्रसंगों के शिल्पांकन के माध्यम से भारतीय मंदिर कला में रामायण परम्परा…