संवत् 2083 विक्रमी | अश्विना शुक्ल षष्ठी | शुक्रवार
नक्षत्र: मूल | योग: शोभन | करण: कौलव
पर्व विशेष : | तदनुसार 16 अक्टूबर 2026
यह लेख भारतीय डाक व्यवस्था की ऐतिहासिक यात्रा को प्राचीन संदेश वाहकों से आधुनिक सेवाओं तक प्रस्तुत करता है। इसमें डाक टिकट पोस्टकार्ड पिनकोड स्पीड पोस्ट एयरमेल और डाकिये की मानवीय भूमिका के साथ बदलते संचार माध्यमों का वर्णन है।
यह लेख महारानी दुर्गावती के जीवन संघर्ष और शासन को राष्ट्र की जिजीविषा के संदर्भ में प्रस्तुत करता है। इसमें गढ़ कटंगा की सत्ता मुगल आक्रमण के प्रतिकार उनके साहस बलिदान और सांस्कृतिक स्वाधीनता के भाव को समझाया गया है।
यह लेख महात्मा गांधी के नेतृत्व को दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह दांडी यात्रा और साम्प्रदायिक हिंसा के समय उनके प्रयासों के माध्यम से समझाता है। इसमें सत्य अहिंसा आत्मानुशासन और जनभागीदारी से विकसित उनके प्रभाव को सामने रखा गया है।
यह लेख महात्मा गांधी को भारत की लोकचेतना और जन-जन से जुड़े विचारक के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें सत्याग्रह, स्वदेशी, चरखा, ग्राम स्वराज, लोकगीत और सर्वजन मंगल के माध्यम से उनके जीवन दर्शन को विस्तारपूर्वक समझाया गया है।
यह लेख 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के संघर्ष को सामने रखता है। इसमें अंग्रेजी शासन के विरोध उनकी गिरफ्तारी बलिदान और महाकौशल तथा गोंडवाना में उनकी स्मृति का वर्णन है।
यह लेख राजा चक्रधर सिंह के जीवन और रायगढ़ दरबार की संगीत परंपरा को सामने रखता है। इसमें रायगढ़ कत्थक घराने गणेश मेले साहित्यिक साधना कलाकार संरक्षण और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में उनके योगदान का वर्णन है विस्तार से।
बघेरा के प्राचीन शूकर वराह मन्दिर की स्थापत्य, शिल्प और धार्मिक विशेषताओं पर केन्द्रित यह आलेख नागर शैली, विशाल वराह प्रतिमा, मूर्तिकला, अभिलेख, इतिहास तथा राजस्थान की समृद्ध मंदिर परंपरा और भारतीय सौन्दर्य-दृष्टि का परिचय प्रस्तुत करता है समग्र रूप।
संविधान सभा की बहसों और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों के माध्यम से यह आलेख धर्मनिरपेक्षता, समता, शिक्षा, परंपरा, अद्वैत और नागरिक स्वतंत्रता के संबंधों को समझते हुए भारतीय गणराज्य की नैतिक तथा बौद्धिक आधारभूमि का विवेचन प्रस्तुत करता है।
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में गौ माता को धर्म, परोपकार, ज्ञान और लोककल्याण से जोड़ा है। यह लेख गौ महिमा, रामावतार, ज्ञानदीप प्रसंग और पृथ्वी के गौ रूप के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना को रेखांकित करता है।
रानी अवंती बाई लोधी की शौर्यगाथा सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम का परिचय देती है। रामगढ़ से देवहारगढ़ तक अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष और उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास की प्रेरक विरासत है।
यह लेख रामगढ़ की रानी अवन्ती बाई के जीवन और सन् 1857 ईस्वी के स्वतन्त्रता संग्राम में उनके योगदान पर आधारित है। इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन, अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष और मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की तथ्यात्मक जानकारी दी गई है।
भारत का वर्तमान मानचित्र प्राचीन जम्बूद्वीप का एक हिस्सा है। देश ने सन् 1946 और 1947 ईस्वी में बँटवारे का दर्द झेला। इस दौरान पश्चिम और पूर्व पाकिस्तान के रूप में एक बड़ा भूभाग देश से अलग हो गया। भारतीय समाज के लिए अपने इतिहास और संघर्षों को याद रखना हमारा कर्तव्य…
यह लेख छत्तीसगढ़ के समाज सुधारक सन्त गहिरा गुरु के जीवन पर आधारित है। इसमें स्वतन्त्रता संग्राम, महात्मा गान्धी से उनके सम्बन्ध, पर्यावरण संरक्षण और समाज सुधार में उनके योगदान की तथ्यात्मक जानकारी दी गई है।
यह लेख भारत की राजनीतिक स्वतन्त्रता और समाज की मानसिक परतन्त्रता का अध्ययन करता है। इसमें सामाजिक पूर्वाग्रहों, सम्प्रदायवाद और सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न मानसिक बन्धनों का तथ्यात्मक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
सन् 1947 ईस्वी के भारत विभाजन, लाखों लोगों के विस्थापन और शरणार्थियों के संघर्ष पर आधारित एक तथ्यात्मक आलेख। यह लेख बँटवारे के समय हुई हिंसा, सरकारी अव्यवस्था और बंगाल एवं पंजाब की त्रासदी का गम्भीर ऐतिहासिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
इस लेख में भारत की राजनीतिक स्वतन्त्रता के साथ आर्थिक स्वाधीनता और स्वदेशी के महत्व पर गम्भीर चर्चा की गई है। लेखक ने ऐतिहासिक सन्दर्भों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत को ही सच्ची स्वतन्त्रता का मूल आधार बताया है।
यह लेख स्वतन्त्रता और स्वाधीनता के वास्तविक अर्थ का विश्लेषण करता है। इसमें ऐतिहासिक और दार्शनिक सन्दर्भों के माध्यम से आत्म अनुशासन और समाज में सात्विक बन्धनों के महत्व को स्पष्ट किया गया है।
9 अगस्त का अन्तरराष्ट्रीय दिवस उन लोगों से जुड़ा है जिन्हें यूरोपीय उपनिवेशवाद ने उनकी भूमि, संस्कृति और स्वतन्त्रता से वंचित कर दिया था। भारत में इसे केवल अनुसूचित जनजातियों का दिवस मानकर शेष समाज को बाहरी/विदेशी ठहराना इतिहास, संविधान और भारतीयता के विरुद्ध है।
यह लेख 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिवीर समशेर सिंह पारधी और पारधी समुदाय के योगदान को सामने लाता है। इसमें उनके रणकौशल, संगठन, बलिदान और जनजातीय स्वाभिमान की उस गौरवगाथा का स्मरण है।
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने विज्ञान, शिक्षा और युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। साधारण परिवार से राष्ट्रपति पद तक पहुँचे कलाम ने आत्मनिर्भर भारत, वैज्ञानिक सोच, नवाचार, नैतिकता और विकसित भारत का सपना दिया। उनका जीवन परिश्रम, सादगी, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक मिसाल है।
प्रस्तुत लेख कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि तथा सैनिकों के त्याग का वर्णन करता है। यह लेख बताता है कि कारगिल युद्ध राष्ट्र की रक्षा और नागरिक कर्तव्य के बीच एक गहरा सम्बन्ध स्थापित करता है।
बारसूर का नाम बाणासुर से जुड़ा है या किसी प्राचीन शासक से? 1060 ईस्वी के शिलालेख और छिन्दककालीन नगर-नामकरण परम्परा से जानिए इसका इतिहास।
यह लेख चन्द्रशेखर आजाद के साहस और भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर आधारित है। असहयोग आन्दोलन की विफलता से लेकर हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नेतृत्व तक, यह लेख उनके त्याग को सामने लाता है। यह विचारों के टकराव के बीच क्रान्तिकारियों के बलिदान की जानकारी देता है।
रायगढ़ जिले के ओंगना गाँव की पहाड़ी पर स्थित लिखामाड़ा शैलाश्रय प्रागैतिहासिक शैलचित्रों, पाषाण उपकरणों और स्थानीय लोकमान्यताओं का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ सामूहिक नृत्य, मानव आकृतियाँ, पशु, ज्यामितीय चिह्न और दशानन जैसी आकृतियाँ मिलती हैं। लिखामाड़ा, आवासीय माड़ा, रावणमाड़ा और बन्दरमाड़ा नामक चार प्रमुख शैलाश्रय इस क्षेत्र की प्राचीन…
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का मुख्य आधार लोक कलाएँ हैं। इनमें पंडवानी का स्थान विशिष्ट है। यह महाभारत पर आधारित एक पारम्परिक लोकगाथा है। कलाकार इसके माध्यम से कथा और अभिनय का सीधा प्रदर्शन करके लोक परम्परा को सहेजते हैं।
पूर्वोत्तर भारत के उन वीर योद्धाओं की गौरवशाली गाथा जानें, जिन्होंने मुगलों और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया। लचित बरफूकन, वीर टिकेन्द्रजीत और अन्य बलिदानियों का प्रेरणादायक इतिहास पढ़ें।
यह लेख भारतीय नाट्यशास्त्र में वाचिक अभिनय के महत्त्व को सामने लाता है। यह लेख औपनिवेशिक सोच को चुनौती देकर सिद्ध करता है कि संवाद और वाणी ही हमारी प्राचीन कला का मूल आधार हैं। दक्षिण कोसल टुडे इस प्रामाणिक अध्ययन का पूर्ण स्वागत करता है।
प्रस्तुत लेख में विल्लुपुरम जिले के एन्नायिरम मन्दिर की विस्तृत पड़ताल की गई है। यह मन्दिर चोल काल में एक प्रमुख विश्वविद्यालय के रूप में विख्यात था। राजेन्द्र चोल प्रथम के संरक्षण में यहाँ ज्ञान और शोध की जो सुदीर्घ परम्परा विकसित हुई वह आज भी हमें विस्मित करती है।
प्रस्तुत लेख भगवान श्रीराम और रामायण के गूढ़ आध्यात्मिक, दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। इसमें राम को आत्मा, सीता को मन, हनुमान को प्राण, लक्ष्मण को चेतना और रावण को अहंकार के प्रतीक रूप में समझाया गया है। यह आलेख बताता है कि रामायण केवल एक…
प्रस्तुत लेख वीरांगना रानी दुर्गावती के अद्वितीय शौर्य, स्वाभिमान और कुशल शासन का प्रेरक वर्णन करता है। इसमें उनके युद्ध कौशल, मुगल सेना के विरुद्ध प्रतिरोध, जल प्रबन्धन, सामाजिक समरसता और मातृभूमि की रक्षा हेतु दिए गए महान बलिदान को रेखांकित किया गया है। रानी दुर्गावती का जीवन भारतीय इतिहास…